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सोमवार, 6 अगस्त 2018

Lord Shri Ganesh ! भगवान् श्री गणेश जी की नमन और वंदन बहुत ही मंगलकारी होता है।

भगवान् श्री गणेश जी की नमन और वंदन बहुत ही मंगलकारी होता है।

Pic credit - Google/https://inextlive.jagran.com

भगवान् गणेश जी की कृपा  जिस व्यक्ति पर रहती है उसकी हर मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है जिस तरह हम किसी कार्य को सुरु करने से पहले भगवान गणेश जी की सर्वप्रथम पूजा अर्चना करते है उसी तरह हमें भगवान् श्री गणेश जी की उपासना भी रखनी चाहिए। सप्ताह में हर दिन किसी न किसी के लिए व्रत रक्खा जाता है जैसे सोमवार भगवान् श्री भोलेनाथ जी की माता पार्वती सहित ध्यानमे रखकर सोमवार को व्रत रखते है। मंगलवार को माता दुर्गा जी के लिए उपवास और पूजा पाठ किया जाता है।
उसी तरह भगवान् श्री गणेश जी की बुधवार को पूजा पाठ और उपवास रक्खा जाता है। इस दिन भगवान् गणेश जी की कथा का श्रवण कर उपवास रखने से हर मनो कामना की पूर्ति होती है। भगवान् श्री गणेश जी की कथा के बारे में बताया  जाता है की एक बार एक व्यक्ति अपने ससुराल गया और कुछ दिन वहा गुजारने के बाद अपनी बीवी को अपने सास ससुर से विदा करने को कहा तो उसकें सास ससुर ने कहा बेटा आज बुधवार है हम लोग आज के दिन कही के लिए भी प्रस्थान नहीं करते है। लेकिन उस व्यक्ति ने ज़िद करने लगा की नहीं आज ही हमको घर के लिए जाना है लेकिन सास ससुर के बहुत समझाने बुझाने के बाद भी जब वह व्यक्ति नहीं माना तो उसके सास ससुर ने उस व्यक्ति के साथ अपने बेटी को विदा कर दिए। रास्ते में चलते चलते कुछ दूर जाने के बाद उसकी पत्नी को बहुत जोर की प्यास लगी तो उसने अपने पति को पाने लाने के लिए कहा।
उसके बाद उस व्यक्ति ने रथ को वही पर रोक कर पानी लेने के लिए चला गया खोजते खोजते जब उस व्यक्ति को पानी मिला तो वह जब पानी लेकर वापस रथ के करीब आया तो देखा की बिलकुल उसी के जैसे एक व्यक्ति उसकी पत्नी के साथ रथ पर बैठा था। जब वह वापस आकर उससे पूछा की तुम कौन हो और हमारी पत्नी के साथ क्यों बैठे हो  तो उसने उसकी बात सुन कर हैरान हो गया उसने कहा की वह ससुराल से अपनी पत्नी को ले कर आ रहा हु। यह सुन कर दोनों आपस में झगड़ने लगे।
यह सब देख सिपाहियों ने उन्हें पकड़ लिया इसके बाद उसे बहुत निराशा हुई और उसने यह देख कर भगवान से कहा की हे भगवान् ये कैसा इन्साफ है जो झूठा है वह सच्चा बन गया है और जो सच्चा है वह झूठा बन गया है। इसके बाद आकाशवाणी हुई की हे मुर्ख आज बुधवार है और इस दिन कही भी सफर नहीं करते  बात नहीं मानी और इस दिन पत्नी को ले आया।
इसके बाद उसे समझ में आया की उसने गलती कर दी। इसके बाद उसने बुधदेव की प्रार्थना की की हे बुध भगवान् हमें माफ़ कर दीजिये। उसके बाद उसको उसकी पत्नी वापस मिल गई उस दिन के बाद से दोनों पति पत्नी भगवान् बुध की पूजा पाठ करने लगे।
ज्योतिष के अनुसार जो व्यक्ति इस कथा को याद करके यात्रा पर जाता है उसको कोई दोस नहीं लगता है। और उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।  

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